बाज़ार तो आज भी जाता हूँ
पर उस दुकान पर तुम्हें ना पाता हूँ
जिंदगी के सफर में बहुत मिले लेकिन
प्यार सिर्फ तुम्हें ही कर पाता हूँ
आज फिर वो प्यारी मुलाकात होती
आँखों ही आँखों में बात होती
शाम तो है पर अकेला है 'मुसाफिर'
काश, तुम भी मेरे साथ होती
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