विज्ञापन

फर्ज के पहरे और इंतज़ार की शाम

Vikash Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दूर रहकर भी दिल में तेरी ही लौ है,
        
                                                    
                            
देख ले आज फिर चाँद पर रोक है।
देश की सेवा में लगे हो तुम,
मगर याद रखना कि फिर करवाचौथ है।
सरहद के उस पार सन्नाटा छाया है,
इस तरफ दिल की धड़कन पे टोक है।
देश की सेवा में लगे हो तुम,
मगर याद रखना कि फिर करवाचौथ है।
छलनी से मैं चाँद को कैसे निहारूँ अब,
यादों की महफ़िल में अजब शोक है।
देश की सेवा में लगे हो तुम,
मगर याद रखना कि फिर करवाचौथ है।
तू फिक्र न कर मेरे सब्र की ‘विक्की’,
इस प्यार पे दुनिया को भी रश्क है।
देश की सेवा में लगे हो तुम,
मगर याद रखना कि फिर करवाचौथ है।

-विकास त्रिपाठी
एक दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all