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फर्ज के पहरे और इंतज़ार की शाम

                
                                                         
                            दूर रहकर भी दिल में तेरी ही लौ है,
                                                                 
                            
देख ले आज फिर चाँद पर रोक है।
देश की सेवा में लगे हो तुम,
मगर याद रखना कि फिर करवाचौथ है।
सरहद के उस पार सन्नाटा छाया है,
इस तरफ दिल की धड़कन पे टोक है।
देश की सेवा में लगे हो तुम,
मगर याद रखना कि फिर करवाचौथ है।
छलनी से मैं चाँद को कैसे निहारूँ अब,
यादों की महफ़िल में अजब शोक है।
देश की सेवा में लगे हो तुम,
मगर याद रखना कि फिर करवाचौथ है।
तू फिक्र न कर मेरे सब्र की ‘विक्की’,
इस प्यार पे दुनिया को भी रश्क है।
देश की सेवा में लगे हो तुम,
मगर याद रखना कि फिर करवाचौथ है।

-विकास त्रिपाठी
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8 घंटे पहले

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