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प्रेम पाग

Vikas Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम मुझे प्रेम संग
        
                                                    
                            
पाग रही हो
मन को अपने
मेरे मन में
गूंथ रही और
बांध रही हो

तुम मुझे प्रेम संग
पाग रही हो

हो तुम मिश्री
से भी मीठी
उसपर स्नेह
तनिक सा मेरा
सौंधे सौंधे
ऊष्म मधुर्मय
बंधन में तुम
बांध रही हो

तुम मुझे प्रेम संग
पाग रही होत

अंग ,अनंग की
प्रीति से पुष्पित
विलय हुए
ऐसे आलिंगित
विवर नहीं कुछ भी
अब किंचित
सहज सरल ही
बांध रही हो

तुम मुझे प्रेम संग
पाग रही हो
- विकास मोहन गुप्ता
3 घंटे पहले
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