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गीतकार शैलेन्द्र का लिखा गीत 'किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार'

गीतकार शैलेन्द्र का लिखा गीत 'किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार'
                
                                                         
                            

किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार
किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार
किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार
जीना इसी का नाम है

माना अपनी जेब से फ़कीर हैं
फिर भी यारों दिल के हम अमीर हैं
मिटे जो प्यार के लिए वो ज़िन्दगी
जले बहार के लिये वो ज़िन्दगी
किसी को हो न हो हमें तो ऐतबार
जीना इसी का नाम है

रिश्ता दिल से दिल के ऐतबार का
ज़िन्दा है हमीं से नाम प्यार का
कि मर के भी किसी को याद आएंगे
किसी के आंसुओं में मुस्कुराएंगे
कहेगा फूल हर कली से बार बार
जीना इसी का नाम है

5 वर्ष पहले

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