लेखिका : मार्शिया चैटलेन
प्रकाशक : पैंथियॉन
मूल्य : 3,234 रुपये (हार्डकवर)
पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखिका मार्शिया चैटलेन की इस बेस्टसेलर किताब में अमेरिका के ऐतिहासिक अश्वेत आंदोलन में शामिल उन अग्रणी महिलाओं की कहानियां हैं, जिन्हें देखा तो गया, पर उनकी आवाज को न के बराबर सुना गया।
1963 में वाशिंगटन में हुआ मार्च इतिहास की सबसे ज्यादा अध्ययन की गई घटनाओं में से एक है। उस दिन, अश्वेत अमेरिकियों के नागरिक व आर्थिक अधिकारों के समर्थन में देश की राजधानी में लगभग ढाई लाख लोगों की भीड़ जमा हुई थी। चूंकि, यह घटना सिर्फ 63 साल पहले हुई थी, इसलिए अकेले अमेरिका में ही उस समय के ऐसे लाखों लोग हैं, जो आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। फिर भी, इस मार्च के बारे में हमारी आम समझ अधूरी है। इससे सबसे ज्यादा जुड़े व्यक्ति मार्टिन लूथर किंग जूनियर हैं, जिनका ‘आई हैव ए ड्रीम’ (मेरा एक सपना है) भाषण कभी न भूलने वाला है। लेकिन, अगस्त के उस गर्म और उमस भरे दिन वहां ऐसी महिलाएं भी मौजूद थीं, जिन्होंने न सिर्फ मार्च में हिस्सा लिया, बल्कि उसे मुमकिन बनाने में भी मदद की। इसके बावजूद, नागरिक अधिकार आंदोलन में उनके योगदान को न तो तब सराहा गया और न ही आज इस बारे में कोई बात करता है।
पुलित्जर पुरस्कार विजेता इतिहासकार मार्शिया चैटलेन अपनी नई किताब, हाउ ब्राइट द पाथ ग्रोज के जरिये याद दिलाती हैं कि अश्वेत महिलाओं की कहानियों को शामिल किए बिना हम इतिहास के एक जरूरी अध्याय की पूरी तस्वीर नहीं समझ सकते। कई पाठकों को किताब के जरिये एना हेजमैन जैसी हस्तियों के बारे में पहली बार जानने का मौका मिलेगा। अपने गहन शोध के जरिये, चैटलेन ने उन महिलाओं की जिंदगी की कहानियों को एकसाथ जोड़ा है, जिन्होंने हिम्मत के साथ जुल्म का सामना किया, भले ही इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत चुकानी पड़ी हो।
चैटलेन, 1929 की हॉलीवुड फिल्म हलेलुयाह में म्यूजिक डायरेक्टर के तौर पर ईवा जेसी की भागीदारी का जिक्र करती हैं। यह फिल्म मिसिसिपी के एक बंटाईदार किसान पर आधारित थी, जिसे किंग विडोर ने निर्देशित किया था। शुरू में, जेसी ने अश्वेत प्रतिभाओं के लिए एक मौके के तौर पर इस फिल्म का पूरे दिल से समर्थन किया था, लेकिन फिल्म रिलीज होने के एक साल बाद, जेसी ने अखबारों में फिल्म की शूटिंग के दौरान अश्वेत कलाकारों व क्रू सदस्यों के साथ हुए भेदभाव का जिक्र किया था।
चैटलेन उन महिलाओं के बारे में भी बताती हैं, जो इस बात से वाकिफ थीं कि मार्च की योजना बनाते समय उन्हें गलत तरीके से पेश किया जा रहा था या नजरअंदाज किया जा रहा था। चैटलेन, एना हेजमैन के बारे में लिखती हैं, जिन्होंने पुरुष नेताओं द्वारा तैयार किए गए मार्च के कार्यक्रम के मसौदे की समीक्षा की थी-‘मार्च का मुख्य मंच ही इस आंदोलन का चेहरा बनने वाला था। इसी से दुनिया को अमेरिकी नागरिक अधिकारों की लड़ाई और उसे आगे बढ़ाने वालों के बारे में पता चलने वाला था, लेकिन बोलने के लिए एक भी अश्वेत महिला को नहीं चुना गया था। संदेश साफ था। महिलाएं मनोरंजन करने के लिए तो ठीक थीं, पर नेतृत्व करने के लिए नहीं।’ हेजमैन ने तब तक हार नहीं मानी, जब तक कि मार्च में उन महिलाओं को सम्मानित करने के लिए एक सूची नहीं जोड़ी गई, जिन्होंने अपने योगदान, विद्रोह और महत्वाकांक्षा के जरिये अहम भूमिका निभाई थी।
चैटलेन की पुस्तक इसलिए भी पढ़ी जानी चाहिए कि यह ‘मार्च ऑन वाशिंगटन’ के बारे में हमारी सामूहिक समझ को भी बेहतर बनाती है।
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