जमीं से आसमां और आसमां से जमीं—
यह खेल सिर्फ़ वक्त रचाता है।
इसलिए न वक्त पर इतराइए, न किसी की हालत पर हँसिए…
क्योंकि समय से बलवान कोई नहीं।
-संजय श्रीवास्तव