प्रकृति का साथ, सिलसिला होना बहुत ज़रूरी,
वरना सेहत की राह हो जाती है कुछ अधूरी।
सूरज की किरणों का तन से स्पर्श हो इनायत,
खुली हवा, पेड़ पत्तों का साथ बने इबादत।
मिट्टी को छूने, सहलाने का सुख है अनूठा,
माटी से जुड़कर ही जीवन लगता है पूरा।
नदी सागर के किनारे जाकर देखो नज़ारे,
शीतल हवा और जल के स्पर्श लगें कितने प्यारे।
दौलत के बेमानी फसानों में मगरूर न होना,
कृत्रिम सुख सुविधाओं में खुद को कैद न करना।
दवाओं के सहारे ही जीवन न गुज़ारा कीजिए,
प्रकृति की गोद में भी कुछ पल गुज़ारा कीजिए।
हरी घास, फूल, पवन और नदियों का साथ,
तन को दें ताज़गी, मन को दें नई सौगात।
प्रकृति से जो जुड़ा, वह जीवन से जुड़ जाता है,
माटी का स्पर्श मन में नवजीवन भर जाता है।