बारिश की बूँदों ने जब, सूरज का हाथ थामा,
आसमान के कैनवास पर, रंगों ने नाम लिखा अपना।
जो धूप अकेली निकली थी, बूँदों से मिलकर ढल गई,
एक किरण थी साधारण-सी, सात रंगों में बँट गई।
सात रंग हैं, सात कहानी,
एक धनुष में दुनिया सारी।
लाल रंग में प्रेम जगा, तो केसरिया विश्वास बना,
पीले ने उम्मीदें बाँटीं, हरे ने जीने का एहसास दिया।
नीले ने गहराई ओढ़ी, जामुनी ने ख़्वाब बुने,
बैंगनी ने चुपके से आकर, मन के सारे राज़ सुने।
सात रंग हैं, सात कहानी,
एक धनुष में दुनिया सारी।
किसी ने पूछा—कौन-सा रंग सबसे सुंदर है इसमें?
सूरज हँसकर कहने लगा—क्या चुनोगे तुम इनमें?
लाल न हो तो प्रेम अधूरा, हरा न हो तो जीवन कहाँ?
नीला छूटे, तो गहराई का फिर अर्थ भला होगा कहाँ?
हर रंग अपनी जगह ज़रूरी, कोई किसी से कम नहीं,
सातों मिलकर सुंदर हैं, अकेले कोई इंद्रधनुष नहीं।
सात रंग हैं, सात कहानी,
एक धनुष में दुनिया सारी।
और देखो, कितनी अजब है इस इंद्रधनुष की रीत,
बादल रोकर थम जाते हैं, तब रंग सुनाते हैं गीत।
शायद जीवन भी ऐसा ही है, दुख के बाद निखरता है,
जो आँसू से आँखें धो ले, उसका मन भी सँवरता है।
हर बिखराव में रंग छिपे हैं, हर टूटन में आस,
बस धूप और बारिश मिलने दो, फिर रंगों का होगा एहसास।
सात रंग हैं, सात कहानी,
एक धनुष में दुनिया सारी।
न सूरज अकेला कर पाता, न बूँदें केवल कर पातीं,
मिलकर ही दोनों नभ पर, रंगों की दुनिया रच पातीं।
तो जीवन में हर रंग रखना, हर रंग का सम्मान करना,
किसी एक रंग से प्रेम हो तो, बाकी रंगों को भी अपनाना।
क्योंकि सुंदरता एक रंग में, कभी पूरी होती नहीं,
और जो सबको साथ रखे—
उससे सुंदर कोई तस्वीर होती नहीं!