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आत्मा का जन्मान्त

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Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जन्म हुआ मेरा (आत्मा) तुमसे (मनुष्य)
        
                                                    
                            
अस्तित्व भी मेरा है तुमसे।
तुमसे मेरी साक्षात्कार हुआ,
मेरी अद्वितीयता भी है तुमसे।

पर चर्चित करे सत्य को आज,
जो बना है अभी तक राज,
जन्म भले तुमसे है हुआ,
मेरे अन्त के हैं अनेकों राज।

है जन्म अंत विहित सबके (मनुष्य)
पर ना अंत मेरा (आत्मा) निर्धारित है।
जब-जब हुए जख्म दिलों में,
मुझे मिली अन्त की ताकिदी है।

चीता जली हर बार मेरी (आत्मा)
टूटी जब-जब रिश्तों की डोर।
विश्वास बनी लकड़ी की सईया
शब्दों ने दी आग सी जोर।

बढ़ चले जब तुम (मनुष्य) आगे इससे,
जन्म मेरा फिर एक बार हुआ।
विश्वास बनी आधारशिला मेरी,
मधु शब्दों से फिर प्रेम आकार बढ़ा।

जन्मांत मेरा हर बार हुआ,
शब्दों के वारित बाणों से।
विश्वास से मेरा जन्म हुआ
है मृत्यु की भी सार इससे।
- दीपिका सिंह
एक दिन पहले
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