विज्ञापन

सुकून की घड़ी

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            स्त्री की गहरी इच्छा
        
                                                    
                            
कभी शब्दों में नही उतरती
प्रिय पुरुष की निकटता में
वह धीरे साँस लेने लगती

फिर देह से पहले
'उपदेश' मन को निर्वस्त्र करती
स्पर्श त्वचा को नही
छुपी कामवासना को करती

संकोच का घूंघट उठता
तब अपनी पलकें झुका देती
गर्दन को चूमता पुरुष
स्त्री बालों में उंगलियाँ देती
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anurag vishwkarma (aiyaar)

8 कविताएं

View Profile

UMAKANT SHARMA

281 कविताएं

View Profile