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मैं मेरी कविता और बबीता

Umakant Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खड़े थे हम दोनों मैं और मेरी फ्रेंड कविता
        
                                                    
                            
कविता ने कहा मुझसे
मुझे भी सुना दो कोई अपनी कविता
कविता को मैं सुना रहा था कविता
तभी आ गई कविता की सहेली बबीता
बबीता बोली
झगड़ा है मेरे और बीच कविता
मैं ना सुनना चाहूं मुंह से एक भी लफ्ज़ ए कविता
मैंने कहा ठीक है बबीता
तुमसे ना बोलेगी कविता
फिर मैंने सुनाना शुरू की अपनी कविता
तभी तैश में आ गई कविता
बोली बंद करो बकवास अब ना सुनूंगी
तुम्हारा एक भी शब्द ए कविता
इतना कह कर चली गई वहां से
दोनों कविता और बबीता
रह गया मैं और मेरी कविता
कैसी लगी तुमको यह कविता...
 
2 घंटे पहले
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