विज्ञापन

कोई नया पौधा, नया छल होगा,

surendra gahlot

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिखे अगर कोई फूल कहीं,
        
                                                    
                            
झट से उसे **तोड़ दो**!
एक क्षण भी समय गंवाए बिना,
सांसों की डोर तोड़ दो!

न देखो उसकी रंगत को,
न उसके रूप पर रिझो,
न मुग्ध हो उस छलावे पर,
न उसकी गंध में भीजो!

कब तक निहारोगे उसे?
कब तक मन में ढोओगे?
उसकी छद्म यादों के पीछे,
कब तक खुद को खोओगे?

आएगा कोई नया मंज़र,
कोई नया पौधा, नया छल होगा,
 
13 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all