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कोई नया पौधा, नया छल होगा,

                
                                                         
                            दिखे अगर कोई फूल कहीं,
                                                                 
                            
झट से उसे **तोड़ दो**!
एक क्षण भी समय गंवाए बिना,
सांसों की डोर तोड़ दो!

न देखो उसकी रंगत को,
न उसके रूप पर रिझो,
न मुग्ध हो उस छलावे पर,
न उसकी गंध में भीजो!

कब तक निहारोगे उसे?
कब तक मन में ढोओगे?
उसकी छद्म यादों के पीछे,
कब तक खुद को खोओगे?

आएगा कोई नया मंज़र,
कोई नया पौधा, नया छल होगा,
 
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9 घंटे पहले

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