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अद्भुत ज्योत्स्ना की यह ज्योति।

Surekha Navratna

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रजत रंग में भीग रही है,
        
                                                    
                            
शीतल शरद की रात हँसी,
अमृत-सुधा बरसाने आया,
चंदा जमीं पर आज सही।

ओढ़े चुनरिया श्वेत-दूधिया,
नभ से उतरी कोई सुंदरी,
शीतल, निर्मल, रस से भीगी,
शब-ए-माहताब यह शर्वरी।

हरी दूब पर तुहिन-कण ज्यों,
तंतु-तंत्र पर मनके पिरोते,
हिय में हर्ष का रंग भरती,
अद्भुत ज्योत्स्ना की यह ज्योति।

सोलह कला से सजकर आया,
चमक उठा देखो जग सारा,
बहने लगी रोशनी की धारा,
मिटा तिमिर, हुआ उजियारा
4 घंटे पहले
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