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एक कचौड़ी दो समोसा आदमी औरत का यही भरोसा।

Suraj Palodia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक कचौड़ी, दो समोसा,
        
                                                    
                            
आदमी-औरत का यही भरोसा।
कचौड़ी बोले—मैं हूँ रानी,
समोसा बोले—मेरी भी कहानी!

कभी दोनों साथ में खाएँ,
कभी एक-दूजे को चिढ़ाएँ।
कचौड़ी बिना समोसा अधूरा,
समोसा बिना कचौड़ी भी अधूरा।

जैसे दोनों मिलकर जीवन सजाएँ,
वैसे ही स्वाद में रंग जमाएँ।
एक में मसाला, एक में जोश,
दोनों मिलें तो मज़ा हो रोज़!

एक कचौड़ी, दो समोसा,
साथ रहे तो क्या है धोखा!
5 घंटे पहले
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Ankit Kumar

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