विज्ञापन

दीपक के विभिन्न रूप

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कितना भी घोर अंधेरा हो,
        
                                                    
                            
दीपक बनकर जलना सीखो,
कितने भी राह में काँटे हो,
उस पर भी कदम बढ़ाना सीखो।

जुगनू बन सदा चमकते रहना,
अपनी चमक को कम मत आँकना,
अपनी नन्ही-सी चमक को कहना,
भटके पथिक को राह दिखाना।

मेहनत की लौ में प्रखर आए तो,
सूरज-सा स्वयं में तेज जगाना,
अपने जीवन के उजियारे से,
परहित आँगन में भोर सजाना।

दीपक से जुगनू, जुगनू से सूरज,
यही विकास की सच्ची पहचान,
खुद जलकर जो राह दिखाए,
वही कहलाए इंसान महान।
-सूबा लाल "अंजाना"
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Sanjay

2 कविताएं

View Profile

Yunush khan

8164 कविताएं

View Profile