कितना भी घोर अंधेरा हो,
दीपक बनकर जलना सीखो,
कितने भी राह में काँटे हो,
उस पर भी कदम बढ़ाना सीखो।
जुगनू बन सदा चमकते रहना,
अपनी चमक को कम मत आँकना,
अपनी नन्ही-सी चमक को कहना,
भटके पथिक को राह दिखाना।
मेहनत की लौ में प्रखर आए तो,
सूरज-सा स्वयं में तेज जगाना,
अपने जीवन के उजियारे से,
परहित आँगन में भोर सजाना।
दीपक से जुगनू, जुगनू से सूरज,
यही विकास की सच्ची पहचान,
खुद जलकर जो राह दिखाए,
वही कहलाए इंसान महान।
-सूबा लाल "अंजाना"
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