विज्ञापन

इक आस

Skand Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल थाम कर देखा
        
                                                    
                            
तो वह बेरहम आबोहवा
मानो ज़रा अलसाई है,
थोड़ी अमन की आहट सी आयी है।

नाउम्मीद थे जिससे
एक हलचल सी मची
अभी-अभी बदन में
थोड़ी गुनगुनाहट सी आयी है।

टिमटिमाती आँखों में
कपकपाते होठों पर
सबकी सलामती की
थोड़ी बुदबुदाहट सी आयी है।

बदलते हालात जिसमें
न थी कोई गुंजाइश
तेरी दुआओं का असर है
थोड़ी हथेलियों में राहत सी आयी है।

(रचना त्रिपाठी, लखनऊ)
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all