वृंदावन की गलियों में जब राधा का नाम पुकारा जाता है,सूना मन भी प्रेम की धुन में धीरे-धीरे मुस्काता है,
यमुना की लहरों से पूछो, किसका प्रेम निराला है,
कृष्ण मिले न मिले मगर राधा ने कृष्ण को मन में पाला है।
पायल की हर रुनझुन में राधा का ही गीत सुनाई देता है, मोरपंख भी उनके प्रेम का कोई राज़ सुनाई देता है,
कुंज-कुंज में उनकी छवि है, कण-कण में अनुराग है,
राधा के बिन श्याम अधूरे, राधा ही तो श्याम का राग है।
बाँसुरी जब श्याम बजाएँ, राधा दौड़ी आती हैं,
साँसों में बस नाम हो जिनके, वो कैसे दूर रह पाती हैं, मिलन मिला तो पल ठहरें, विरह मिला तो रात बनी,राधा के इस प्रेम ने जग में प्रेम की पहचान बनी।
न माँगा कोई राजमहल, न माँगी कोई दौलत थी,
श्याम की एक झलक ही राधा के जीवन की दौलत थी,प्रेम जहाँ पर पूजा बन जाए, राधा वहीं दिखाई देती हैं,कृष्ण कहीं भी हों दुनिया में, राधा वृंदावन में रहती हैं।
राधा प्रेम हैं, राधा भक्ति, राधा मन की आस हैं,
राधा के चरणों में जैसे कृष्ण स्वयं विश्वास हैं,
नाम भले दो हों दोनों के, धड़कन एक सुनाई है,
राधा में ही श्याम बसे हैं, श्याम में राधा समाई है।
वृंदावन की धूल उठे तो माथे से लगा लेना,राधा नाम की एक माला मन से कभी न भुला देना,जिसने सच्चे मन से राधा के प्रेम को अपना माना है,उसने इस संसार में रहकर भी प्रेम का धाम पहचाना है।
राधा नाम जपो तो मन में प्रेम की गंगा बहती है, वृंदावन की राधा आज भी कृष्ण के संग ही रहती है।