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जय शनिदेव

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कर्मों का लेखा रखते हो, तुम न्याय के रखवाले हो, गिरते हुए इंसानों के, तुम ही भाग्य सँभालने वाले हो।
        
                                                    
                            
काली छाया, गहन निगाहें, फिर भी मन में दया अपार, सच्चे मन से जो भी ध्याए, करते उसका बेड़ा पार।
तेल चढ़ाए, दीप जलाए, श्रद्धा के जब फूल खिलें, शनिदेव की कृपा से भक्तों के सूने भाग्य खिलें।
न धन का मद, न छल की माया, तुमको कुछ भी भाता है, सच्चे कर्मों की राह चलने वाला ही सुख पाता है।
राजमहल हो या झोपड़ियाँ, सबका एक विधान है, कर्मों के अनुसार ही मिलता, जीवन में सम्मान है।
दुख की घड़ियाँ चाहे आएँ, मन में धीरज रखना है, शनिदेव की शरण में रहकर, सत्य की राह पर चलना है।
जो निर्बल का साथ निभाए, जो परपीड़ा हरता है, न्यायदेव उस भक्त के मन में, आशा का दीप धरता है।
हे शनिदेव! कृपा बरसाना, मन से अहंकार मिटाना, सत्य, दया और धर्म की राह पर, हम सबको चलाना।
तेरे दर पर शीश झुकाकर, बस इतनी अरदास है, कर्म हमारे नेक रहें प्रभु, जीवन में विश्वास है।
जय शनिदेव, जय शनिदेव, गूँजे हर संसार, न्याय तुम्हारा अटल रहे प्रभु, महिमा अपरंपार।
एक दिन पहले
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