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हे माँ लक्ष्मी, कृपा बरसाना

Shreya Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कमल के आसन पर विराजो, माँ रूप तुम्हारा प्यारा है, तेरी कृपा की एक किरण से, जग में उजियारा है।
        
                                                    
                            
स्वर्णिम आभा, मुख पर शोभा, हाथों में वरदान है, तेरे चरणों में ही माँ, सुख-शांति का धाम है।
तेरे आने से खिल उठता, सूना-सूना आँगन है, तेरी कृपा जहाँ बरसती, मंगलमय वह जीवन है।
न धन का मद हो, न मन में माया, ऐसा ज्ञान सिखाना माँ, मेहनत की रोटी मीठी लगे, ऐसा भाग्य बनाना माँ।
जिस घर में सम्मान हो सबका, वहाँ निवास तुम्हारा हो, जहाँ दया और प्रेम बसे माँ, आशीषों का धारा हो।
किसी की थाली खाली न हो, कोई भूखा सोए नहीं, किसी गरीब की आँखों में माँ, मजबूरी का रोना नहीं।
धन के संग सद्बुद्धि देना, मन में सेवा भाव रहे, तेरी भक्ति के दीप तले माँ, हर घर में सद्भाव रहे।
रूठे भाग्य सँवर जाएँ माँ, सूनी झोली भर जाए, तेरी कृपा की छाँव मिले तो, हर मुश्किल भी टल जए।

न सोना माँगूँ, न चाँदी माँगूँ, न महलों का संसार, बस इतनी कृपा बनाए रखना, बना रहे तेरा प्यार।
जय लक्ष्मी, जय महालक्ष्मी, गूँजे तेरा नाम, तेरे चरणों में माँ मिल जाए, जीवन का विश्राम।
9 घंटे पहले
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