आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हे माँ लक्ष्मी, कृपा बरसाना

                
                                                         
                            कमल के आसन पर विराजो, माँ रूप तुम्हारा प्यारा है, तेरी कृपा की एक किरण से, जग में उजियारा है।
                                                                 
                            
स्वर्णिम आभा, मुख पर शोभा, हाथों में वरदान है, तेरे चरणों में ही माँ, सुख-शांति का धाम है।
तेरे आने से खिल उठता, सूना-सूना आँगन है, तेरी कृपा जहाँ बरसती, मंगलमय वह जीवन है।
न धन का मद हो, न मन में माया, ऐसा ज्ञान सिखाना माँ, मेहनत की रोटी मीठी लगे, ऐसा भाग्य बनाना माँ।
जिस घर में सम्मान हो सबका, वहाँ निवास तुम्हारा हो, जहाँ दया और प्रेम बसे माँ, आशीषों का धारा हो।
किसी की थाली खाली न हो, कोई भूखा सोए नहीं, किसी गरीब की आँखों में माँ, मजबूरी का रोना नहीं।
धन के संग सद्बुद्धि देना, मन में सेवा भाव रहे, तेरी भक्ति के दीप तले माँ, हर घर में सद्भाव रहे।
रूठे भाग्य सँवर जाएँ माँ, सूनी झोली भर जाए, तेरी कृपा की छाँव मिले तो, हर मुश्किल भी टल जए।

न सोना माँगूँ, न चाँदी माँगूँ, न महलों का संसार, बस इतनी कृपा बनाए रखना, बना रहे तेरा प्यार।
जय लक्ष्मी, जय महालक्ष्मी, गूँजे तेरा नाम, तेरे चरणों में माँ मिल जाए, जीवन का विश्राम।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर