बनके आये हो जीवन हमारे लिए ।
जिन्दगी अपनी कुर्बां तुम्हारे लिए ।।
मैं भुला दूं तुम्हे ऐसा होगा नही ।
सारी दुनिया भुला दूं तुम्हारे लिए ।।
आइये छोड़ दीजे ये शर्मो हया ।
हम हैं पलके बिछाये तुम्हारे लिए ।।
सामने हर घड़ी तेरी तस्वीर है ।
आईना बन गए हो हमारे लिए ।।
इम्तेहां मेरा जब चाहो ले लो सनम ।
सर खुशी से कटा दूं तुम्हारे लिए ।।
युवा कवि एवं शायर
शिवसागर यादव 'आद्रवनी'
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