इस तरह सच छुपाये जाते है ।
धर्म-मजहब लड़ाये जाते है ।।
चैन की नींद सोते है नेता ।
और गले हम कटाये जाते है ।।
आसमाँ छू रही है महँगाई ।
टैक्स हर दिन बढ़ाये जाते है ।।
लूट ले जो समूच भारत को ।
पारसा वो बताये जाते है ।।
नीरव मोदी , ललित , विजय , मेहुल ।
अब ये लुटेरे भगाये जाते है ।।
शौक से गीत आज सागर के ।
महफ़िलों में सुनाये जाते है ।।
युवा कवि एवं शायर
~ शिवसागर यादव 'आद्रवनी'
निवासस्थान-धानी
जिला - महाराजगंज (उत्तरप्रदेश)
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।