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धर्म -मजहब लड़ाये जाते है

Dharm Majhab Ladaye Jaate Hai
                
                                                         
                            इस तरह सच छुपाये जाते है ।
                                                                 
                            
धर्म-मजहब लड़ाये जाते है ।।

चैन की नींद सोते है नेता ।
और गले हम कटाये जाते है ।।

आसमाँ छू रही है महँगाई ।
टैक्स हर दिन बढ़ाये जाते है ।।

लूट ले जो समूच भारत को ।
पारसा वो बताये जाते है ।।

नीरव मोदी , ललित , विजय , मेहुल ।
अब ये लुटेरे भगाये जाते है ।।

शौक से गीत आज सागर के ।
महफ़िलों में सुनाये जाते है ।।

युवा कवि एवं शायर
~ शिवसागर यादव 'आद्रवनी'
निवासस्थान-धानी
जिला - महाराजगंज (उत्तरप्रदेश)

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8 वर्ष पहले

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