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दास ओछी है सियासत ये तबाही का जमाना है

Shivcharan Dass

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कागज कलम ना रोशनाई का जमाना है
        
                                                    
                            
शहद में लिपटी ये सफाई का जमाना है

जान लेकर भी सनम की मुस्कुराते बेहिचक
यूँ वफ़ा के नाम पर ये बेवफाई का जमाना है

कोई जीये या मरे किसको किसकी है पड़ी
चासनी में जहरवाली ये मिठाई का जमाना है

प्यार भी बाजार में बिकता है खुले आम अब
पैसा फेंको देखो तमाशा ये उगाही का जमाना है

हर तरफ है खूँ खराबा हर तरफ ही जंग है
दास ओछी है सियासत ये तबाही का जमाना है
एक दिन पहले
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Dn Chaubey

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