अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
आप का ख़त नहीं मिला मुझ को
दौलत-ए-दो-जहाँ मिली मुझ को
- असर लखनवी
फ़लक पे चाँद मोहर्रम का जब नज़र आया
सफ़र में याद मुसाफ़िर को अपना घर आया
- नसीम घोसवी
'मीर' अमदन भी कोई मरता है
जान है तो जहान है प्यारे
- मीर तक़ी मीर
यही ज़िंदगी मुसीबत यही ज़िंदगी मसर्रत
यही ज़िंदगी हक़ीक़त यही ज़िंदगी फ़साना
- मुईन अहसन जज़्बी
आए ठहरे और रवाना हो गए
ज़िंदगी क्या है, सफ़र की बात है
- हैदर अली जाफ़री
कभी ख़िरद कभी दीवानगी ने लूट लिया
तरह तरह से हमें ज़िंदगी ने लूट लिया
- हफ़ीज़ बनारसी
Urdu Poetry: आदमी का आदमी हर हाल में हमदर्द हो