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दाग़ देहलवी: मोहब्बत का असर जाता कहाँ है

dagh dehlvi famous ghazal mohabbat ka asar jata kahan hai
                
                                                         
                            

मोहब्बत का असर जाता कहाँ है
हमारा दर्द-ए-सर जाता कहाँ है

दिल-ए-बेताब सीने से निकल कर
चला है तू किधर जाता कहाँ है

अदम कहते हैं उस कूचे को ऐ दिल
इधर आ बे-ख़बर जाता कहाँ है

कहूँ किस मुँह से मैं तेरे दहन है
जो होता तो किधर जाता कहाँ है

तिरे जाते ही मर जाऊँगा ज़ालिम
मुझे तू छोड़ कर जाता कहाँ है

हमारे हाथ से दामन बचा कर
अरे बेदाद-गर जाता कहाँ है

तिरी चोरी ही सब मेरी नज़र में
चुरा कर तू नज़र जाता कहाँ है

अगरचे पा-शिकस्ता हम हैं ऐ 'दाग़'
मगर क़स्द-ए-सफ़र जाता कहाँ है

4 घंटे पहले

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