कागज कलम ना रोशनाई का जमाना है
शहद में लिपटी ये सफाई का जमाना है
जान लेकर भी सनम की मुस्कुराते बेहिचक
यूँ वफ़ा के नाम पर ये बेवफाई का जमाना है
कोई जीये या मरे किसको किसकी है पड़ी
चासनी में जहरवाली ये मिठाई का जमाना है
प्यार भी बाजार में बिकता है खुले आम अब
पैसा फेंको देखो तमाशा ये उगाही का जमाना है
हर तरफ है खूँ खराबा हर तरफ ही जंग है
दास ओछी है सियासत ये तबाही का जमाना है
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