सच की राह दिखाने वाले, प्यारे-प्यारे बापू,
अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले, प्यारे-प्यारे बापू।
हाथों में चरखा लेकर, मेहनत करना सिखलाया,
सादा जीवन जीकर हमने, सच्चा सुख है पाया।
झूठ न बोलें, सच ही बोलें, सच का साथ निभाएँ,
मिल-जुलकर हम हँसते-गाते, भारत को महकाएँ।
ऊँच-नीच का भेद न मानें, सबको गले लगाएँ,
दुख में जो भी हमें पुकारे, उसके पास हम जाएँ।
घर-आँगन, गली साफ रखें, मिलकर इन्हें सजाएँ,
स्वच्छ-सुंदर भारत अपना, मिलकर इसे बनाएँ।
बापू की राह चलेंगे हम, सच का दीप जलाएँ,
सबसे हँसकर मिलें हमेशा, खुशियाँ खूब मनाएँ।
किसी से हम बैर न रखें, सबके बनें दुलारे,
सच की राह चलें हम, मिलकर देश सँवारे।
छोटे-छोटे दीप जलाएँ, दूर करें अँधियार,
बापू की सीख साथ लेकर, करें देश से प्यार।
सच की राह दिखाने वाले, प्यारे-प्यारे बापू,
अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले, प्यारे-प्यारे बापू।
-सनातन मुकुंद