आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बापू की राह : बालगीत

                
                                                         
                            सच की राह दिखाने वाले, प्यारे-प्यारे बापू,
                                                                 
                            
अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले, प्यारे-प्यारे बापू।

हाथों में चरखा लेकर, मेहनत करना सिखलाया,
सादा जीवन जीकर हमने, सच्चा सुख है पाया।
झूठ न बोलें, सच ही बोलें, सच का साथ निभाएँ,
मिल-जुलकर हम हँसते-गाते, भारत को महकाएँ।

ऊँच-नीच का भेद न मानें, सबको गले लगाएँ,
दुख में जो भी हमें पुकारे, उसके पास हम जाएँ।
घर-आँगन, गली साफ रखें, मिलकर इन्हें सजाएँ,
स्वच्छ-सुंदर भारत अपना, मिलकर इसे बनाएँ।

बापू की राह चलेंगे हम, सच का दीप जलाएँ,
सबसे हँसकर मिलें हमेशा, खुशियाँ खूब मनाएँ।
किसी से हम बैर न रखें, सबके बनें दुलारे,
सच की राह चलें हम, मिलकर देश सँवारे।

छोटे-छोटे दीप जलाएँ, दूर करें अँधियार,
बापू की सीख साथ लेकर, करें देश से प्यार।
सच की राह दिखाने वाले, प्यारे-प्यारे बापू,
अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले, प्यारे-प्यारे बापू।
-सनातन मुकुंद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर