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कोरोना को कहो 'ना'

Shakti Patel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धरती पर अभिशाप कोरोना, हम सब इस पर वार करें ।
        
                                                    
                            
आओ सब जन मिलकर, तत्पर हो इसका संहार करें ॥
महामारी यह खूब फैल रही, हमको इसे हराना है ।
मानव जाति की रक्षा कर, जीवन हमें बचाना है ॥
समय में हम ना जागे तो फिर, यह घर - घर आ जाएगी ।
नहीं बचेगी मानव जाति, भू सूनी हो जाएगी ॥
नित्य नहाएँ साफ रहें सब, बार – बार हम हाथ धुलें ।
बाहर से जब आएँ हम तो, हाथ,मुंह-पद सभी धुलें ॥
साफ सफाई नित्य करें और निर्मलता फैलाएँ अब ।
हानिप्रद विष-अणु कोरोना, जड़ से इसे मिटाएँ सब ॥
मास्क, रुमाल या गमछा, कपड़ा सब जन मुंह में बांध चलो ।
सुनलो हाथ से मुंह अपना अब कोई भी बिलकुल नहीं मलो ॥
पानी गंदा, खुला व दूषित बिलकुल अब तो नहीं पियो ।
बीमारी यह अतिघातक है, इसे हरा कई बरस जियो ॥
शाकाहारी बन जाओ सब, मांस का सेवन नहीं करो ।
मांसाहार से दूर रहो सब, इसका चिंतन नहीं करो ॥
मंत्रजाप भी उत्तम साधन, भगवत पूजन सदा करो ।
उनसे कहना हे भगवंता, विपदा यह अब बेगि हरो ॥
ऐसा करलें हम सब मिलकर, फिर विपदा टल जाएगी ।
इस धरती पर फिर सब देखना, खुशहाली छा जाएगी ॥
मानव जाति है संकट में, सब जन मिल उपचार करें ।
धरती पर अभिशाप कोरोना, हम सब इस पर वार करें ॥


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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