विज्ञापन

सोचने की बात

Shahana Parveen

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल अपना नहीं
        
                                                    
                            
जिस्म अपना नहीं
धन अपना नहीं
घर अपना नहीं
फिर घमंड क्यों अपना?
गुरूर क्यों अपना?
झूठ क्यों अपना?
फरेब क्यों अपना?
-शाहाना परवीन 'शान'... 
7 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all