दिल अपना नहीं
जिस्म अपना नहीं
धन अपना नहीं
घर अपना नहीं
फिर घमंड क्यों अपना?
गुरूर क्यों अपना?
झूठ क्यों अपना?
फरेब क्यों अपना?
-शाहाना परवीन 'शान'...
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