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प्रेम

Shahabuddin Shahabuddin

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ वजह है बेवजह मुस्कुराने की
        
                                                    
                            
याद आती नहीं यूं तुम्हें दीवाने की

ये सुना है बहुत फ़साना साज़ हैं वो
नाम लेने में तोउजरत नहीं बहाने की

देखना उनका मेरी ओर अदा से जाना
जाते जातीं नहीं आदात ये जताने की

देखना शीशे में सौ बार तस्दीक लिये
हुस्न की उफ!ये अदा आज़माने की

शाह चाहत के ये अन्दाज़ निराले ठहरे
क्या ज़ुरूरत भला इसमें दिल लगाने की

शहाब उद्दीन शाह क़न्नौजी

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8 वर्ष पहले
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