मर्द
मर्द रोता नहीं, ये किसने कहा है…
बस वो आँसू छुपाना सीख गया है…
घर की जिम्मेदारियों में ऐसा उलझा,
खुद को ही भूल जाना सीख गया है…
मजबूत दिखने के पीछे कहीं,
टूट जाना भी रोज़ का हिस्सा है…
सबके लिए खड़ा रहता है जो,
उसे संभालने वाला कोई किस्सा है…?
सब को संभालता है खुद कहीं ना कही
अकेला है
कुछ कैह नहीं पता है ?