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मधुशाला नहीं कुसुम बाला हो तुम

Saurav Rhythm

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न कोई जाम हो तुम न कोई प्याला हो तुम
        
                                                    
                            
महफिल की रौनक हुस्न का उजाला हो तुम
अरे जिसे देखकर ये सौरव लिखता है ग़ज़ल
वो मधुशाला नहीं कुसुम बाला हो तुम
18 घंटे पहले
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