विज्ञापन

अंधेरी गलियों से गुजरा मन,न किसी के साथ चली

Saurabh dixit

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलते चलते कई राहों से,कइयों से मुलाकात हुई
        
                                                    
                            
किसी ने दिए ग़म कई,किसी से दिल की बात हुई

अंधेरी गलियों से गुजरा मन,न किसी के साथ चली
अकेली दुर्गम राहों से भटकते,कई दिन और रात ढली
  -सौरभ दीक्षित
                                    
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all