चलते चलते कई राहों से,कइयों से मुलाकात हुई
किसी ने दिए ग़म कई,किसी से दिल की बात हुई
अंधेरी गलियों से गुजरा मन,न किसी के साथ चली
अकेली दुर्गम राहों से भटकते,कई दिन और रात ढली
-सौरभ दीक्षित
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