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जगो! जगो! हे भाग्य विधाता

SAUMY MITTAL

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जगो! जगो! हे भाग्य विधाता
        
                                                    
                            
हे भारत के मतदाता ।

संकट-कंटक बडा विकट है
गिरोह गिद्ध का खड़ा निकट है
राजनीति का सियार समूह भी
नोंच-नोंच  कर लाशें खाता
जगो! जगो! हे भाग्य विधाता
हे भारत के मतदाता ।


परमारथ का पहन मुखौटा
प्रतिनिधि बनकर झूठा-मूठा
राजधर्म की यज्ञ वेदी पर
अपराधों का रक्त चढाता
जगो! जगो! हे भाग्य विधाता
हे भारत के मतदाता ।

बगुले जैसा स्वांग रचाकर
परजीवी सा घातक बनकर
सहानुभूति के चक्र जाल में
मछुआरे की तरह फंसाता
जगो! जगो! हे भाग्य विधाता
हे भारत के मतदाता ।

करदाता के रथ पर चलता
पथ में आते उन्हे कुचलता
अर्थी को फिर कांधा देकर
मरघट से भी कफन चुराता
जगो! जगो! हे भाग्य विधाता
हे भारत के मतदाता ।
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