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ये धूप छाँव जिंदगी

Saroj Yadav

Mere Alfaz
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                            ये धूप छाँव जिंदगी सपनो का गांव जिंदगी
        
                                                    
                            
सुलझे नही जो उम्र भर उलझन तमाम जिंदगी

कभी मिले खुशी कहीं कहीं दुखों का राज है
कभी मिले है नैमते कभी गमों का ताज है
तड़प उठे है दर्द से कभी आराम जिंदगी
सुलझे नही जो उम्र भर उलझन तमाम जिंदगी

कभी कोई दिल के पास है कोई जिंदगी में खास है
कोई हंस रहा है झूम के कोई हर घड़ी उदास है
परवाह से भरपूर और अनजान कहीं जिंदगी
सुलझे नही जो उम्र भर उलझन तमाम जिंदगी

मेरे लिए भी जिंदगी हर दिन नया अध्याय है
लेती है इम्तहान तो नतीजा भी उसके हाथ है
दे जीत की मुस्कान तो कभी हताश जिंदगी
सुलझे नही जो उम्र भर उलझन तमाम जिंदगी

जैसी भी है हसीन है भले वफ़ा की है कमी
देती हंसी ज़रा सी तो सागर से ज्यादा दे नमी
नगदी का काम गम का और खुशियां उधार जिंदगी
सुलझे नही जो उम्र भर उलझन तमाम जिंदगी

जाने क्या इसके खेल है बदले क्या रूप रंग है
समझे कोई किसी तरह ऐसा न इसका ढंग है
बदले है रंग रोज ये रचती है स्वांग जिंदगी
सुलझे नही जो उम्र भर उलझन तमाम जिंदगी

ये धूप छाँव जिंदगी सपनो का गांव जिंदगी
सुलझे नही जो उम्र भर उलझन तमाम जिंदगी

सरोज यादव सरु

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