प्यारी धरती प्यासी धरती
व्याकुल धरती आकुल धरती
तेरे दुख के कारण हम है
हमसे तेरे सारे गम हैं
फिर भी प्यार लुटाती धरती
खुद चाहत की प्यासी धरती
हम अब तुझे सजाएं धरती
तेरी प्यास मिटायें धरती
तुझको प्यारे तेरे पौधे
गिरे पड़े जो सूखे औंधे
उनपर प्यार लुटाएं धरती
तेरी गोद सजाएं धरती
फिर से बगिया खिल जाएगी
चिड़िया तितली मिल जाएगी
रूठ गए जो काले बादल
बूंदे उनसे गिर जाएंगी
झूम उठेगा तनमन सबका
खुशियां हम ले आएं धरती
सरोज यादव सरु
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