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मेरा निरीह सत्य

Saroj Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आश्चर्य है हमें आपकी बुद्धिमानी पर
        
                                                    
                            
नतमस्तक रहेंगे आपके चातुर्य पर
आप झूठ को पहना पाते हैं अभेद्य कवच
आप फरेब को दे पाते है अमरत्व
मेरा सच हो जाता है निरीह शस्त्रहीन
नहीं टिक पाता आपके चक्रव्यूह के आगे
लाजिमी है आपका गर्वित होना
अपनी विजय दिलाती इन हथियारों पर
लेकिन आश्चर्य है आपके चेहरे को देख
यहाँ विजय की मुस्कान की जगह ली है
घोर कालिमा ने
अमावस की रात की कालिमा ने
अच्छा होगा ले आओ स्वयं की विरासत को देखने के लिए
मेरे निरीह सत्य जैसा उजाला
स्वयं के अंधकार में विलुप्त होने से पहले
क्योंकि मेरा सत्य तुम्हे आलोकित नही होने दे रहा
और जीत कर भी हारते नजर आ रहे हो तुम

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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