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मेरा निरीह सत्य

                
                                                         
                            आश्चर्य है हमें आपकी बुद्धिमानी पर
                                                                 
                            
नतमस्तक रहेंगे आपके चातुर्य पर
आप झूठ को पहना पाते हैं अभेद्य कवच
आप फरेब को दे पाते है अमरत्व
मेरा सच हो जाता है निरीह शस्त्रहीन
नहीं टिक पाता आपके चक्रव्यूह के आगे
लाजिमी है आपका गर्वित होना
अपनी विजय दिलाती इन हथियारों पर
लेकिन आश्चर्य है आपके चेहरे को देख
यहाँ विजय की मुस्कान की जगह ली है
घोर कालिमा ने
अमावस की रात की कालिमा ने
अच्छा होगा ले आओ स्वयं की विरासत को देखने के लिए
मेरे निरीह सत्य जैसा उजाला
स्वयं के अंधकार में विलुप्त होने से पहले
क्योंकि मेरा सत्य तुम्हे आलोकित नही होने दे रहा
और जीत कर भी हारते नजर आ रहे हो तुम

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले

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