कहते हो राह में तेरे ठोकर हजार हैं
मैं क्या करूं मुझे बड़ा ठोकर से प्यार है
दुनिया में मैं भी हूँ मगर दुनिया मेरी नही
कहने के लिए सब यहां सभी के यार हैं
कोई किसी के प्यार में ठुकराए दो जहाँ
पूछो तो दिलो जान से उसपे निसार है
कोई किसी के प्यार को ठुकराए शौक से
करने को बेवफाई बहाने हजार हैं
जिसने वफ़ाएं की है मिला सिर्फ रंजोगम
तनहाइयाँ मिले तो वो रोये है जार जार
राहे वफ़ा की मंजिले होती कमाल हैं
शोलों भरी दरिया मगर जाना भी पार है
जाहिर है सभी मिटने के समान हैं यहां
ये मौत का नशा है मगर सब तलबगार है
मरने का खौफ़ पूछिये हंसकर जवाब दें
आशिक फ़ना हुए हैं फसाने हजार हैं
सरोज यादव
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