आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कहते हो राह में तेरे ठोकर हजार हैं

Kahate Ho Rah Men Tere Thokar Hokar Hann
                
                                                         
                            कहते हो राह में तेरे ठोकर हजार हैं
                                                                 
                            
मैं क्या करूं मुझे बड़ा ठोकर से प्यार है
दुनिया में मैं भी हूँ मगर दुनिया मेरी नही
कहने के लिए सब यहां सभी के यार हैं
कोई किसी के प्यार में ठुकराए दो जहाँ
पूछो तो दिलो जान से उसपे निसार है
कोई किसी के प्यार को ठुकराए शौक से
करने को बेवफाई बहाने हजार हैं
जिसने वफ़ाएं की है मिला सिर्फ रंजोगम
तनहाइयाँ मिले तो वो रोये है जार जार
राहे वफ़ा की मंजिले होती कमाल हैं
शोलों भरी दरिया मगर जाना भी पार है
जाहिर है सभी मिटने के समान हैं यहां
ये मौत का नशा है मगर सब तलबगार है
मरने का खौफ़ पूछिये हंसकर जवाब दें
आशिक फ़ना हुए हैं फसाने हजार हैं

सरोज यादव

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर