जिस पल तुमने मुझे अपना कहा
तेरे स्नेह ने मुझको जीत लिया
अब असर रहेगा जीवन भर
अमृत घट तुमने मनमीत दिया
जितना भी क्रोध करोगे तुम
एक बोझ बढ़ेगा अब मुझपर
एक एक लम्हे को जिया है
तेरे स्नेह का अमृत पीया है
सदियों का सुख जैसे पाया
जब मुझपे पड़ी तेरी छाया
एक बार अगर तुम रुष्ट हुए
काले जीवन के पृष्ठ हुए
मैंने साँसों को अब स्वेच्छा से
मानो तुमको उपहार दिया
जिस पल तुमने मुझे अपना कहा
तेरे स्नेह ने मुझको जीत लिया
सरोज यादव सरु
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