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चलना ही प्रकृति का नियम है...

Saroj Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलना चाहिए चलना ही प्रकृति का नियम है,
        
                                                    
                            
भले ही चलने में कभी जान बूझकर ठोकर खाएं.
ठोकर भी शिक्षक है,मौन रह ज्ञान देता है .
सिखाता है हमारी कमियों को दूर करना,
दिखाता है दुनिया की चालाकियां.
जरूरी है अपनी दुनिया से बाहर आकर ठोकर खाना,
ठोकर भी एक शिक्षक है ,
सिखाता है जरूरी नही तुम बहुत अच्छे रहो,
बेच कर अपना आत्मसम्मान .
जरूरी है पहचान करना अपने स्व की,
और बढ़ जाना आगे अपने सम्मान की खातिर,
भले ही कभी कभी करे मन कातर प्रार्थना,
मगर प्रार्थना सुन कर कमजोर होना ठोकर का अपमान होगा.
क्योंकि ठोकर शिक्षक है सिखाता है कल स्वयं को जवाब देना

-सरोज सरु

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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