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बहुत याद आते हो तब दोस्त मेरे

Saroj Yadav

Mere Alfaz
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                            उदासी भरे दिन उदासी की रातें
        
                                                    
                            
जो तुम पास होते गले मिल बताते

बहुत याद आते हो तब दोस्त मेरे
बनावट की बातों से जब कोई घेरे

अच्छा था अब भी अगर तुम सताते
ये इतना नही मेरे दिल को जलाते

उदासी भरे दिन उदासी की रातें
जो तुम पास होते गले मिल बताते

जो कहना है कहलो इजाजत है तुमको
इबादत से ज्यादा मुहब्बत है हमको

कोई रिश्ता इतना भी प्यारा नही है
इस दोस्ती का किनारा नही है

मशरूफियत से जो बाहर तुम आते
तो फिर से वो ख्वाबों के दिन हम बिताते

उदासी भरे दिन उदासी की रातें
जो तुम पास होते गले मिल बताते

सरोज यादव सरु

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